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हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं में ज्यादातर ट्रक ड्राइवर, इन उपायों से बचा सकते हैं उनकी जान

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ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार देश में 80 लाख ट्रक रजिस्टर्ड हैं, जबकि ट्रक ड्राइवरों की संख्या इससे कम है। आखिर राष्ट्रीय राजमार्ग का सबसे ज्यादा उपयोग करने वाले यह ट्रक ड्राइवर अपने पेशे में आने से घबराते क्यों हैं?

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने देश में सड़क दुर्घटना को लेकर एक आंकड़ां जारी किया है। इसके अनुसार 2015 से 2018 के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग पर 2,10,000 लोगों की जानें गई हैं, जिसमें ज्यादातर ट्रक ड्राइवर शामिल हैं

ये आंकड़ें साल दर साल बढ़ती जा रही हैं। 2017 की तुलना में 2018 में इन आंकड़ों में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि भी दर्ज की गई।

विशेषज्ञों की मानें तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन ट्रक ड्राइवरों के लिए उचित आऱाम और उन्हें तनाव मुक्त रखना इन आंकड़ों में कमी ला सकता है।

ट्रक ड्राइवर ही क्यों?

बात अगर ट्रक ड्राइवरों की करें तो वे नींद की कमी, अपर्याप्त आराम और अपने खुद के माल की डिलिवरी और उसकी सुरक्षा को लेकर तनाव में रहते हैं। उनके पास न तो उचित आराम की जगह है, ना हीं ठीक से खाना खाने का विकल्प है।

वो हमेशा इस चिंता में रहते हैं कि ट्रक से दूरी कहीं उनके माल के चोरी का कारण न बन जाए। कंपनिया उन्हें समय से पहले डिलिवरी करने पर इंसेंटिव भी देते हैं, जिसके कारण वो समय से पहले डिलिवरी करने के तनाव में रहते हैं।

इसके अलावा परिवहन अधिकारी और स्थानीय अधिकारी भी उनसे टोल प्लाजा पर गलत व्यव्हार करते हैं।

इनके अलावा राजमार्ग पर बरती जाने वाली सावधानियों के अभाव से भी दुर्घटना होती है। राजमार्गों का उपयोग करने वाले लोगों को लेन ड्राइविंग, साइनेज, ओवर-स्पीडिंग आदि के बारे में जागरुक करने की जरुरत है, क्योंकि कभी-कभी ट्रक ड्राइवर लगातार 15-16 घंटे तक ड्राइव करते हैं।

डॉक्टर एमसी मिश्रा जो एम्स के पूर्व निदेशक हैं, उनका कहना है कि ट्रक ड्राइवर, उनके सहकर्मी और आम लोगों को बेसिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम की ट्रेनिंग देने की जरुरत है।

जिससे की वो अस्पताल पहुंचने से पूर्व प्राथमिक उपचार कर सकें। क्योंकि ज्यादातर हाईवे पर होने वाले दुर्घटना का पहला गवाह या उन तक पहुंचने वाला पहला व्यक्ति कोई पान वाला, धाबा वाला, चाय वाला या फिर छोटो-मोटा दुकानदार होता है।

अगर इन लोगों को शुरुआती उपचार जैसे रक्तस्राव को रोकना, , सीने में संपीड़न और सांस की समस्या को कम करने आदि की बुनियादी ट्रेनिंग दे दी जाए तो लाखों लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है।

इसके अलावा सरकार को ट्रक ड्राइवरों के लिए नई नीति बनाने की भी आवश्यकता है, क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया गया तो आने वाला समय यह क्षेत्र ड्राइवरों की समस्या से दो-चार हो सकता है।

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