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जीपीएस आधारित होगा टोल कलेक्शन, आने वाले समय में बंद होंगे सभी टोल प्लाजा

डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने की दिशा में सड़क परिवहन मंत्रालय ने पहले फास्टैग को अनिवार्य बनाया और अब, जब लगभग 90% वाहन चालकों ने फास्टैग की सेवा अपना ली है तो भारत सरकार ने एक नया निर्णय लिया है। जिसके बाद आने वाले दो सालों में टोल प्लाजा को पूरी तरीके से खत्म कर दिया जाएगा।

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दरअसल केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार ग्लोबल पोजिस्निंग सिस्टम यानि जीपीएस सिस्टम को अंतिम रूप देने वाली है, जिसमें दो साल का वक्त लगेगा। एक बार इस सिस्टम के आ जाने से पूरे देश में टोल प्लाजा की जरूरत नहीं रह जाएगी।

फिलहाल टोल प्लाजा पर फास्टैग के आ जाने से लोगों की मुश्किलें थोड़ी आसान हुई थी और वो सरकार के इस कदम से बेहद खुश थे। हालांकि कुछ टोल प्लाजाओं पर ठीक तरह से फास्टैग काम नहीं करने की शिकायतें भी आ रही थी।

लेकिन अब, जब सरकार टोल प्लाजा को पूरी तरीके से खत्म करने की योजना बना रही है तो निश्चित रूप से ये खबर आम लोगों के लिए एक राहत भरी खबर है, क्योंकि इससे उनकी यात्रा में जरा भी रूकावट नहीं आएगी।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि टोल प्लाजा के खत्म होने का मतलब ये कतई नहीं है कि आपको टोल कलेक्शन नहीं देना होगा, बल्कि सरकार इसके लिए फास्टैग से भी हाईटेक तरीका अपनाने के बारे में सोच रही है।

इसके लिए सरकार जीपीएस सिस्टम पर काम कर रही है। इसलिए फिलहाल सभी कॉमर्शियल वाहनों पर ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य करने की बात सरकार ने कही है।

वाहन चालकों के साथ सरकार को भी होगा फायदा….

ऐसा नहीं है कि इस सिस्टम के आ जाने से केवल आम लोगों की मुश्किलें कम होंगी, बल्कि सरकार की आमदानी में भी जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। केवल फास्टैग के आ जाने से हीं प्रतिवर्ष टोल कलेक्शन 72 करोड़ रुपये से बढ़ कर 92 करोड़ रुपये हो गया है।

यदि सरकार पूरी तरीके से जीपीएस सिस्टम पर काम करने योग्य हो जाएगी तो इससे अगले पांच सालों में टोल आय 1,34,000 करोड़ रुपए हो जाएगी। इतना ही नहीं इससे प्रदूषण और ईंधन की भी बचत हो सकेगी।

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