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नई स्क्रैपेज पॉलिसी की घोषणा, 15 साल पुरानी कॉमर्शियल वाहनों पर लगेगी रोक

कोरोना महामारी के कारण प्रभावित ऑटोसैक्टर रिकवरी के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए ऑटोसैक्टर को सरकार की मदद की जरूरत थी। बजट 2021-22 से ऑटोसैक्टर को जीएसटी की दरें कम करने और स्कैपेज पॉलिसी की घोषणा की उम्मीद थी।

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लेकिन उनकी एक मांग पूरी कर ली गई और नए बजट में स्क्रैपेज पॉलिसी की घोषणा कर दी गई। इस घोषणा से ऑटोसैक्टर को उम्मीद है कि अब सेल में उछाल आ सकेगी। क्योंकि इस घोषणा के बाद निजी वाहन की उम्र 20 साल और कॉमर्शियल वाहन की उम्र 15 साल हो गई है।

15 साल से पुराने कॉमर्शियल वाहन अब सड़कों पर नहीं चल सकेंगे। 15 साल होने पर सभी कॉमर्शियल वाहनों को फिटनेस जांच करानी होगी। इस नीति से देश की आयात लागत कम होगी और पर्यावरण के अनुकूल तथा ईंधन की कम खपत करने वाले वाहनों को बढ़ावा मिलेगा।

आपको बता दें कि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय पहले ही इस नीति को हरी झंडी दिखा चुका है। हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि सरकारी विभागों व सार्वजनिक उपक्रमों के पास मौजूद 15 साल से पुराने वाहनों को कबाड़ करने की नीति जल्दी ही अधिसूचित की जायेगी और इसे एक अप्रैल 2022 से लागू भी कर दिया जाएगा।

स्क्रैपेज पॉलिसी से क्या फायदा होगा ऑटोसैक्टर को?

पिछले साल ऑटोसैक्टर ने जो हालात देखे वो किसी से छिपी नहीं है। स्क्रैपेज पॉलिसी के आने से लोगों की डिमांड में बढ़ोतरी होगी। पूरे देश में फिटनेस सेंटर बनाए जाएंगे, जिससे 50 हजार लोगों के लिए रोजगार सृजन हो सकेगा।

पुराने वाहनों के सड़कों से हटने पर प्रदूषण में कमी आएगी, क्योंकि नए वाहन पुराने वाहन की तुलना में 10-12 प्रतिशत कम प्रदूषण फैलाते हैं। वाहनों के दाम में कमी आएगी। इस नीति के लागू होने से 10 हजार करोड़ के निवेश ऑटोसैक्टर में आएंगे।

इसके अलावा व्यर्थ धातुओं के रिसाइकल का मार्ग खुलेगा, जिससे ऑटो पार्ट्स के दामों में कमी आएगी और बेहतर ईंधन दक्षता के चलते आयात लागत में कमी से भी ऑटोसैक्टर को फायदा होगा।

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