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वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन और फिटनेस परिक्षण शुल्क में हो सकती है बढ़ोतरी

पहले स्क्रैपेज पॉलिसी की घोषणा और अब वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन और फिटनेस परिक्षण शुल्क में बढ़ोतरी के संकेत ये बताने के लिए काफी है कि सरकार पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए कड़े कदम उठा रही है।

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सरकार ये कदम स्क्रैपेज पॉलिसी के अंतर्गत उठा सकती है, जिसका उद्देश्य है कि सड़कों पर पुराने वाहनों की संख्या कम से कम हो और प्रदूषण पर नियंत्रण किया जा सके। जल्द ही निजी वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन और कॉमर्शियल वाहनों के फिटनेस शुल्क में बढ़ोतरी की जाएगी।

हालांकि फिलहाल ये साफ नहीं किया गया है कि ये बढ़ोतरी कितनी होगी, लेकिन इतना तय है कि इस वृद्धि का सबसे ज्यादा असर मध्यम और भारी कॉमर्शियल वाहन मालिकों पर पड़ेगा। अधिकारियों की तरफ से एक बयान में कहा गया कि हाइक वाहनों की विभिन्न श्रेणियों के लिए अलग-अलग होगी।
सरकार के इस कदम से “ईंधन-कुशल, पर्यावरण के अनुकूल वाहनों को प्रोत्साहित करने में मदद होगी और तेल आयात लागत को कम किया जा सकेगा।

स्क्रैपेज पॉलिसी के तहत अब निजी वाहनों को 20 साल और कॉमर्शियल वाहनों को 15 साल के बाद फिटनेस टेस्ट कराना अनिवार्य होगा, तभी वो आगे सड़कों पर चल सकेंगे।

स्क्रैपेज पॉलिसी का असर ऑटोसैक्टर पर दिखेगा इसमें कोई संदेह नहीं है लेकिन इस पॉलिसी से ऑटोसैक्टर अपने बिगड़े हालात को किस हद तक पटरी पर ला पाएगी और ग्राहकों का इसमें कितना सहयोग मिलेगा इस बात पर इसकी सफलता निर्भर करेगी।

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