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सीएनजी बसों ने दी पश्चिम बंगाल में दस्तक

पश्चिम बंगाल सरकार नहीं चाहती है कि दिल्ली की तरह वो भी प्रदूषण की मार सहे, शायद इसलिए वक्त से पहले उन्होंने प्रदूषण रोकने के लिए एक बड़ा फैसला किया है।

दरअसल पश्चिम बंगाल पहली बार अपने बेड़े में सीएनजी बसों को शामिल करने जा रहा है। मार्च 2020 से इन बसों को शामिल कर लिया जाएगा। इतना ही नहीं सरकार 70 नई इलेक्ट्रिक बसों को भी शामिल करने पर विचार कर रही है। आपको बता दें की 80 इलेक्ट्रिक बसें पहले ही अलग-अलग रुटों पर चलाई जा रही है, जो सफल भी रही है।

राज्य की परिवहन निगम ने कहा कि फिलहाल सीएनसी गैस के रिफिल करने का कोई साधन नहीं है, इसलिए शुरुआत में गेल के साथ करार किया गया है। जिसके तहत गेल टैंकर की मदद से इन बसों में सीएनजी की रीफिलिंग करेगी, बाद में निगम सीएनजी रीफिलिंग स्टेशन का भी निर्माण करेगी।

राज्य परिवहन मंत्री शुभेंदू अधिकारी का कहना है कि सरकार प्रदूषण को लेकर गंभीर है और आने वाले दिनों में उन्हें उम्मीद है कि इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों के इस्तेमाल से इसमें कमी आएगी।

उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के लिए राज्य में पहले से ही 55 चार्जिंग स्टेशन मौजूद हैं और बाकियों पर काम चल रहा है। बस डिपो के सौंदर्यकरण पर भी काम चल रहा है।

अधिकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल में राज्य परिवहन की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2011 में 2 लाख यात्री थे, जिसकी संख्या बढ़कर अब 6-8 लाख हो गई है।

इस पहल के पीछे सरकार का उद्देश्य है कि वो राज्य परिवहन निगम से 3,000 करोड़ राजस्व हासिल करे। सरकार राज्य सड़क परिवहन की कायापलट करना चाहता है। इसके लिए सरकार ने वर्ल्ड बैंक से 3,300 करोड़ का लोन लिया है। आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल के यात्रियों को इस बदले हुए व्वस्था का लाभ जरुर मिलेगा।

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